
कोलकाता: पश्चिम बंगाल के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति के गलियारों में उस समय हलचल तेज हो गई, जब नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) ने बंगाल के 20 लोकसभा सांसदों के अपनी पार्टी में विलय की आधिकारिक सूची जारी कर दी। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सभी सांसदों को औपचारिक रूप से शामिल कर लिया गया है, जिससे संगठन को राष्ट्र निर्माण में एक नई ताकत मिलेगी।
टीएमसी (TMC) के बागी बने एनसीपीआई का चेहरा
जून 2026 में पहली बार राष्ट्रीय सुर्खियों में आई इस क्षेत्रीय पार्टी ‘NCPI’ का दामन थामने वाले सभी नेता सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसद हैं। इन नेताओं ने केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जुड़ने के इरादे से यह बड़ा कदम उठाया है।
एनसीपीआई द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची में ये प्रमुख नाम शामिल हैं:
सुदीप बंद्योपाध्याय, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, माला रॉय, मिताली बाग, पार्थ भौमिक, अधिकारी दीपक देव (देव), डॉ. शर्मिला सरकार, सयानी घोष, बापी हलदार, कालीपद सारेन खेरवाल, जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, प्रसून बनर्जी, अरूप चक्रवर्ती, असित कुमार मल, यूसुफ पठान, जून मालिया, खलीलुर रहमान, मोहम्मद अबू ताहेर खान और रचना बनर्जी।
‘हम 20 सांसदों को उनके हक से कैसे वंचित कर सकते हैं?’ : किरेन रिजिजू
इस विलय को लेकर संसद के मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने तीखा विरोध किया और वॉकआउट भी किया। इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का रुख साफ करते हुए कहा:
अध्यक्ष के पाले में है गेंद:
“विपक्ष का बहिष्कार क्षणिक और औपचारिक था। एनसीपीआई के इन 20 लोकसभा सांसदों ने हस्ताक्षर करके लोकसभा अध्यक्ष से सदन में अलग बैठने की व्यवस्था करने की मांग की है। यह पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत है और मामला अभी माननीय अध्यक्ष के विचाराधीन है। जब तक अंतिम फैसला नहीं आता, वे सदन के सदस्य हैं और हम उन्हें चर्चा से कैसे वंचित रख सकते हैं? लोकसभा सभी की है।”
रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार ने संसद में प्रतिनिधित्व करने वाले सभी फ्लोर लीडर्स (लगभग 40 दलों के नेता) को आमंत्रित किया था, एनसीपीआई को कोई विशेष या अलग से न्योता नहीं दिया गया था।
मानसून सत्र को लेकर सरकार की अपील: ‘हंगामे से नहीं, चर्चा से निकलेगा रास्ता’
सर्वदलीय बैठक के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वैश्विक अनिश्चितताओं (विशेषकर पश्चिम एशिया के संकट) का हवाला देते हुए सभी दलों से राष्ट्रहित में एकजुट होकर काम करने की अपील की।
संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष को दो टूक लहजे में नसीहत देते हुए कहा कि जो पार्टियां चर्चा से भागकर केवल हंगामा करती हैं, उन्हें जनता के बीच सिर्फ राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि मानसून सत्र के लिए सरकार ने 8 महत्वपूर्ण विधेयकों (Bills) की सूची पहले ही बुलेटिन के जरिए जारी कर दी है। यदि कोई अन्य नया कानून लाया जाएगा, तो पहले बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) में विपक्ष को भरोसे में लिया जाएगा।

